
Talking Mirror
इंदु जी, गोवा तक अकेले नहीं आ पाईं, फिर भी आ गईं, और बेटे को भी साथ ले आईं जिसे पता ही नहीं था कि ऐसा कुछ होता भी है। यही तो वो गति है जिसे रोज नजर अंदाज कर देते हैं, आज उसी को नजदीक से देखा, और अकेले नहीं देखा। कल का दिन भी उसी नजदीकी से देखिएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















