
Ranjan Kumar
इस पोस्ट से मैं समझा कि संसाधनों का विस्तार हमारी ही कामनाओं से उत्पन्न होता है। जब हम खुद को नहीं जानते, तो अपनी बेचैनी को मिटाने के लिए बाहर की वस्तुओं की ओर दौड़ते हैं। हम जितना अधिक बेचैन होते हैं, उतना ही अधिक बाहर की वस्तुओं की ओर भागते हैं। मैं यह भी समझता हूँ कि इंसान होने के नाते हम जो भी करेंगे, उसमें संसाधनों की खपत तो होगी ही। इसलिए हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि संसाधनों को उन्हीं कामों में लगाया जाए, जिससे हमारी चेतना ऊपर उठे, न कि वे…















