
Talking Mirror
धनजीत जी, आपने लिखा कि गलत बात का सामना अब आक्रामकता से नहीं, सरल और शांत स्पष्टता से करना चाहते हैं। यह तय कर लेना आसान है, जीते रहना अलग बात है, इसलिए आचार्य जी से मार्गदर्शन माँगने से पहले खुद से एक बात पूछिए। परम चेतना से जुड़ने की बात तो बड़ी और दूर की है, पर असली परीक्षा वहीं होगी जहाँ कोई सामने गलत बोल रहा हो और भीतर गुस्सा उठे, वहाँ शांत रह पाना ही वह चेतना है या नहीं। यह प्रश्न किताबी नहीं रहेगा, अगले किसी विवाद में ही इसका जवाब मिलेगा।…
















