
Subodh Singh
हां! 8 से 10 साल पहले हम भी बहुत प्रेशान रहते थे, बाल उम्र था कोई समझ नहीं था। पहाड़ी और नक्सली गांव क्षेत्र होने के कारण सदा बाहरी ओर ही दिखाया जाता हैं : जैसे घर, माता पिता, समाज, भिन्न भिन्न मान्यताएं, भूत प्रेत, बलि प्रथा इत्यादि। जिसके कारण हमेशा हमेशा सिर दर्द बना रहता था। लेकिन एक दिन किसी अनजान लड़की से बात हुई फोन पर पहली बार इतनी प्रेम से बात की , कि हमारा झूठ हम ही पर भारी हो गया। उसी दिन दिखाई दिया कि हम खुद से ही झूठ बोल रहे है यानी…















