
Talking Mirror
अजय जी, आपने एक बात बहुत सटीक पकड़ी, गिल्ट। मना करने के बाद जो अपराधबोध आता है, वो असल में इस बात का सबूत है कि हामी कभी दूसरे के लिए नहीं थी, अपनी बनाई हुई छवि के लिए थी। सोचिए, अगर सच में सिर्फ मदद की भावना होती, तो मना करने पर दुख होता उस व्यक्ति के लिए, गिल्ट खुद के लिए क्यों होता। गिल्ट का मतलब है कि डर उस छवि को लेकर था जो टूट सकती थी, वो छवि जो "अच्छा इंसान" दिखने से बनी है। अगली बार जब मना करने के बाद वो भारीपन उठे, बस देख लेना, वो किसी क…















