
Ganga ji
हमें किसी स्त्री को उसकी वास्तविकता और स्वतंत्र पहचान के साथ स्वीकार करना चाहिए, न कि अपनी बनाई हुई “अच्छी स्त्री” की भूमिका में बाँधकर। उसे जैसी होना चाहिए, यह तय करने के बजाय उसे अपने निर्णय और जीवन को स्वयं चुनने की स्वतंत्रता देना ही सच्चा सम्मान है।















