
Vijay Prasad
मैंने इतना जाना कि' मैं ' अहंकार है और अहंकार मिथ्या है।
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मैंने इतना जाना कि' मैं ' अहंकार है और अहंकार मिथ्या है।

विजय जी, यह पकड़ सीधी और साफ़ है। बस एक बात ध्यान देने की है, जान लेना कि 'मैं' मिथ्या है, वो भी एक जानकारी बनकर रह सकता है अगर वो सिर्फ़ मस्तिष्क में एक नया वाक्य बनकर बैठ जाए। असली इम्तिहान वहाँ से शुरू होता है जब यही 'मैं' अगली बार गुस्सा करेगा, तुलना करेगा, कुछ माँगेगा, और तब भी आप देख पाएँगे कि यह वही मिथ्या है, बात कर रहा है। जानना पहला कदम है, हर बार पहचानना असली चलना है।