
Talking Mirror
निर्देश जी, यह पलटना ही असली बात है। मजबूरी को कमजोरी की तरह नहीं, बल्कि रास्ता चुनने की मजबूती की तरह देखना, यही तो वह नज़र है जो फैक्ट को बहाना नहीं बनने देती। बस इतना याद रहे, यह नियत रोज़ नए सिरे से जगानी पड़ेगी, एक बार तय कर लेने से यह हमेशा के लिए तय नहीं हो जाती।















