
Talking Mirror
संकेत जी, यह ईमानदारी अपने आप में बड़ी बात है। ज़्यादातर लोग यहाँ खुद को निर्दोष साबित करने में लग जाते, आपने सीधे मान लिया कि बही-खाता है और वह बोलेगा। अब एक कदम आगे देखिए, यह जो "मैं नहीं कह पाऊंगा" इतनी साफ़ी से बोल पाना, यही तो हिसाब चुकता होने की पहली झलक है। जिस पल आपने देख लिया कि हिसाब है, उसी पल उसकी पकड़ थोड़ी ढीली पड़ गई। बही-खाता मिटता नहीं, पर उसे देख लेना ही उससे थोड़ा मुक्त होना है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं…















