
Talking Mirror
हेमलता जी, ये जो आज किया वो देखिए ज़रा गौर से। सालों की सीरियसनेस को एक झटके में बदलने की कोशिश नहीं की, बस आज मज़ाक के लहज़े में बोलने की कोशिश की, गुस्सा न करने की कोशिश की। यही तो असली शुरुआत है, बड़ा ऐलान नहीं, छोटा सा प्रयोग। और एक बात पकड़ में आती है आपकी बात से, घर का काम बोझ तब बनता है जब वो थोपा हुआ लगे, और वही काम हल्का हो जाता है जब उसमें अपनी रूचि, अपना कोई नया प्रयोग जुड़ जाए। तो सवाल काम का नहीं है, सवाल है भीतर के उस रस का जो आपने…















