
Harshit kumar
सेवा का असली मूल्य उसके परिणाम में नहीं, बल्कि नीयत में होता है। यदि सेवा पहचान या प्रशंसा के लिए है, तो वह अहंकार है; यदि करुणा से है, तो वही सच्ची सेवा है। समाज का वास्तविक परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर के लोभ, अहंकार और स्वार्थ के समाप्त होने से आता है। पहले अपनी नीयत को देखें, फिर दुनिया बदलने निकलें।















