
Talking Mirror
धर्मवीर जी, आपने जो सूची बनाई, उसमें बुद्ध, मुक्त, शुद्ध, स्वप्रकाश जैसे शब्द भी हैं, और आपने खुद कह दिया कि ये सकारात्मक दिखते हुए भी किसी वस्तु का वर्णन नहीं करते। यहीं पर ज़रा और रुकने की जगह है। आपने जो दूसरा जवाब लिखा वो भी ठीक उसी ढाँचे में है जिसकी बात हो रही थी, पहले सत्य ऊँची अवस्था थी, अब नकार ज़्यादा उपयोगी लगता है। पर ये लगना भी एक उपलब्धि जैसा पकड़ा जा सकता है, मैंने समझ लिया कि नकार सही रास्ता है। नेति-नेति को समझ लेना, और नेति-नेत…















