
Sarita
शुरू शुरू में लगता है कि जो गुरु कहते हैं वो हमें समझ आ गया तो उसी समय नालायकी में यह उँगली भी उठती है, लेकिन जैसे ही आप खुद को उस गहराई में उतरने लगते हैं तब कहीं जाकर एहसास होता है कि आप तो बहुत ही उथले स्तर पर थे और उँगली उठाने का दुस्साहस तब तो उस उँगली का कट जाना ही बेहतर है l आज समझ आता है कि उस गुरु की बात को अपने अंदर जितना भी समा लो, वो पात्रता जाने कभी आएगी भी या नहीं l लेकिन यदि गुरु कृपा हो जाए तो वो समय भी आ सकता है जब शिष्य अपने गुर…















