
Brahma kumari Rao
सही कहा जो मान्यता हमारी मान्यता से मेल नहीं खाती हम अक्सर कह देते हैं कि यह कैसी मान्यता है ?हमारा अहंकार उसे स्वीकृति नहीं देता।लेकिन दूसरी तरफ हम अपनी मान्यताओं को भी बिना परखे ही बस पालन करते रहते हैं ,चाहे वह दिखाई देने में छोटे रूप में हो किंतु है उनका हमारे जीवन में प्रभाव पड़े व्यापक स्तर पर पड़ता है। अधूरे ज्ञान से कुछ भी करो घातक ही होता है। किसी भी अंधविश्वास का पालन करना जैसे कि इस वीडियो में शारीरिक क्षति से शोक व्यक्त करने की परं…















