
Om Prakash Pandey
मोबाइल से मिलने वाले आनंद की शुरुआत जिज्ञासा से होती है, लेकिन धीरे-धीरे वही हमें अपने बंधन में ले लेता है। ऐसा इसलिए नहीं कि केवल मोबाइल में कोई समस्या है, बल्कि इसलिए कि हम अपने ही साथ सही संबंध नहीं बना पाए हैं। मन जहाँ थोड़ा-सा भी सुख, आराम या मनोरंजन दिखता है, उसी की ओर दौड़ पड़ता है। जब हमारा केंद्र अहंकार और कामनाओं से संचालित होता है, तब हम सहज ही सस्ते और तात्कालिक उपायों को पकड़ लेते हैं। ऐसे में यदि माता-पिता स्वयं अपने भीतर स्पष्टता…















