
Talking Mirror
अनुराधा जी, आपने भोग वृत्ति की बात कही, और यही वो जगह है जहाँ अक्सर बात रुक जाती है। पूछिए, जिस दिन AC का तापमान एक डिग्री बढ़ाने को कहा जाए, या गाड़ी छोड़कर पैदल जाना पड़े, वहाँ अंदर क्या उठता है। जलवायु सम्मेलन दूर की बात है, असली परीक्षा वहाँ है जहाँ अपनी ही सुविधा में एक इंच की कटौती माँगी जाए।















