
Deepak Mauryan
समाज में ये सोच स्त्री और पुरुष दोनों में बैठा दिए गए है कि एक स्त्री ऐसे चलती,बोलती ,खाती है और ये कम स्त्रियों का है कोई पुरुष करे तो लोग उसे तुरंत मना करने लगते है। मैं अपने जीवन से बताऊं तो बचपन में जब कभी घर में अपनी दीदी को खाना बनाते,कपड़ा घुलते,घर की सफाई करते देखता था तो बस इतना मन में आता था कि बेचारी बहुत काम करती है लेकिन कभी भी ये नहीं हुआ कि मैं उसके काम में मदद कर दूं या मिलजुल कर काम कर लिया जाय केवल इसलिए कि ये तो औरतों/लड़कियों…















