
RADHA RAY
नमस्ते आचार्य जी नहीं मैं अपने शरीर को अपने नजर से नहीं देख रही हूं किसी ने कहा पतला होना,गोरा होना,लम्बे बाल होना, बड़ी बड़ी आंखें होना कद काठी होना सुंदर होना वगैरह वगैरह अपना कुछ नहीं है हां मुझे लगा था कि अब मैं पतली हो गई तो पुरा हो गई पर ये सत्य नहीं है सत्य तो कुछ और है हमारी असली सुंदरता हमारे अपने जीवन में हमने कौन कौन से झुठी मान्यताओं को, परम्पराओं को पकड़ रखा है उसे सही नीयत से देखना समझना और जानना है धन्यवाद















