
Sarita Kushwaha
1. सत्य के प्रति पूर्ण समर्पण की कमी है। अहंकार भारी पड़ने लगता है। 2.आराम से ज्यादा डर मुझे पूर्ण समर्पण से रोक रही है। 3.अपने डर को हराने की लड़ाई, जिससे जितना है। 4.अगर उसी साहस का एक प्रतिशत भी आ जाए तो जीवन वहां होगी, जहां होनी चाहिए। जीवन धनिया जैसा तो बिल्कुल भी नहीं होती और यदि हर किसी के जीवन में इतना भी साहस आ जाएं तो, पूरी दुनिया ही गीता नेशन होती।















