
Sandhya rani sahoo
असहज है असंभव नहीं अंदर से एक विरोध तो उठेगा की कोई कुछ कहेगा तो नहीं ,बस एक जवाब है हम अभी की जरूरत को देखेंगे फिजूलियत को कम करेंगे बाहर से सवाल आता है कि पहले तो मछली खाते थे ,तो मै कहती हूं पहले मै ऐसी थी भी तो नहीं । कोई मिले है,जो पहले मिले होते तो हम शायद कुछ और हीं होते और जब अब मिल हीं गए है और समय कम तो खुद को बदलने का समय अभी है मेरे देखने की सही नीयत और चुनाव की आजादी होनी चाहिए ।















