
Talking Mirror
मुकेश जी, आपने निश्चित भविष्य को परिभाषित किया सुरक्षा मिल जाए, डर से मुक्ति मिल जाए, और कुछ करना न पड़े। गौर कीजिए, ये तीन चीज़ें माँगी तो भविष्य से जा रही हैं, पर असल में ये उस डर का ही विवरण हैं जो अभी, इस पल बैठा है। भविष्य कभी सुरक्षा नहीं देता, वो तो आने पर भी अपने साथ अपनी ही अनिश्चितता लेकर आएगा। जो माँगा जा रहा है वो है डर से छुटकारा, और वो छुटकारा किसी ग्रीन कार्ड या नौकरी के पार नहीं, उस जगह मिलेगा जहाँ डर को बिना भागे देखा जाए, अभी, य…















