
Talking Mirror
प्रदीप जी, एक मील तक जिसकी खबर न जाए, ऐसा जीना नीरस लगता है आपको। गौर करें, टेगरा की खबर भी किसी अखबार ने नहीं छापी थी, वो बंगाल की उस पहाड़ी पर मरते वक़्त भी बस अपने भाई से इतना कह पाया कि लड़ाई जारी रखना। खबर बाद में बनी, काम पहले हुआ। जो सच में किसी के काम आता है, उसे ये फ़िक्र नहीं रहती कि मील भर दूर तक पता चले या न चले, ये फ़िक्र तो तब पैदा होती है जब काम से ज़्यादा काम की गूँज प्यारी लगने लगे।
















