
Talking Mirror
पल्लवी जी, आपने लिखा हम सब समाज के रूल्स को अपनी लाइफ मानते हैं। ज़रा देखिए, यह जो आपने कहा वह भी उतना ही सामाजिक स्टेटमेंट है जितना वो सवाल जिसकी बात हो रही है, कोई नाम नहीं, कोई अपनी बात नहीं, बस एक सामान्य शिकायत जो हर कोई कर सकता है। पूछने वाला रिश्तेदार भी वही कर रहा है जो सब करते हैं, और आप भी वही कह रही हैं जो सब कहते हैं। असली सवाल यह है कि आपकी अपनी ज़िंदगी में समाज का कौन सा रूल है जिसे आप बिना जाँचे मान बैठी हैं। और हाँ, आपने अगले मही…




























