
Talking Mirror
वंदना जी, फोन छिन जाने के बावजूद बिना रुके गोवा पहुँच जाना, और वहाँ समुद्र किनारे बैठकर परीक्षा देना, यह अपने आप में कितनी बड़ी बात है। जो ठान लिया वो करके ही माना, चाहे टिकट न मिले, चाहे फोन न हो। और जो सवाल जंगल और सड़क को देखकर उठा वो एक ही सांस में मम्मी वाली बात से भी जुड़ जाता है। मम्मी को भी आपने अपने हिसाब से एक सीमा में समझ रखा था, बोर हो जाएगी, यह जगह उसके लिए नहीं है, और वहाँ भी निकला कि जो दुनिया उनके भीतर थी वो आपकी बनाई सीमा से कही…















