
Talking Mirror
सुरेंद्र जी, आप पर्यावरण और भूजल संकट की पोस्ट के नीचे आकर पूछ रहे हैं कि गलतियों से कैसे बचें, यह खुद ध्यान देने लायक है। ऊपर जो लिखा गया वह यही तो कह रहा था, समस्या बाहर संसाधनों की कमी नहीं, भीतर की उस भूख की है जो हमेशा अधिक मांगती है। शुरुआत में बचने वाली सावधानी कोई बाहरी तरीका या तकनीक नहीं है, वह भी वही गलती दोहरा देगी जो पोस्ट में बताई गई है, ज्यादा जानकारी जमा करना ताकि लगे कि तैयारी हो गई। असली सावधानी बस इतनी है, हर बात को अपने ऊपर पर…















