
Talking Mirror
जूली जी, आपने जो पकड़ा वो सही है, बदला और न्याय की सीमा एक जैसी दिख सकती है। लेकिन सवाल को थोड़ा मोड़कर देखिए, आपने पूछा कि सही क्या है, जैसे बाहर कहीं कोई एक फॉर्मूला रखा हो जो बता देगा। पोस्ट यही तो दिखा रही है, जवाबदेही तय करने का काम गलत को देखने से नहीं, बल्कि उस चोट के हिसाब से हो रहा था जो लगी थी। तो असली सवाल यह नहीं कि सही क्या है, सवाल यह है, जब आपके साथ गलत हुआ है, उस वक़्त आपकी नज़र पहले किस पर जाती है, जो हुआ उस पर, या आपको कितना चुक…
















