
Pranjal
प्रश्न यह है: ❓ मैंने अपने होने को दूसरों की नज़र का मोहताज क्यों बना रखा है? जिस ‘मैं’ को हर क्षण किसी से प्रमाण चाहिए कि वह कुछ है, वही अपने लिए कारागार बना लेता है। 🔗 दूसरे व्यक्ति से छुटकारा नहीं, उस झूठी पहचान को ईमानदारी से देखना ज़रूरी है, जो दूसरे की स्वीकृति पर टिकी है। आपके जीवन में कहाँ आप किसी और को अपना नर्क घोषित कर लेते हैं? देखिए, नर्क कहाँ है, उस व्यक्ति में या उससे बँधी हुई उस आशा में? ~ मैने परिवार को और विद्यालय के कुछ सदस्य…















