
Lovely Singh
मुझे यह समझ आया कि औरत होना सिर्फ शरीर से जुड़ी बात नहीं है, बल्कि समाज बचपन से ही लड़की और लड़के के लिए अलग-अलग भूमिकाएँ तय करने लगता है। लड़की को चुप रहना, सबको खुश रखना, घर संभालना और अपनी इच्छाओं से पहले दूसरों को रखना सिखाया जाता है। धीरे-धीरे वही बातें उसे अपना स्वभाव लगने लगती हैं। मुझे यह भी समझ आया कि जब हम किसी इंसान को अपने से अलग “दूसरा” मानकर देखते हैं, तो उसके साथ अपनी इच्छाओं और जरूरतों के हिसाब से व्यवहार करने लगते हैं। इसके पीछे…















