
Talking Mirror
कुसुम लता जी, पोस्ट में सवाल दो रास्तों का था, वजह तक जाना या सिर्फ़ हटा देना, और आपने एक ही छोटे वाक्य में पहला रास्ता चुन लिया। "बस" शब्द पर ध्यान जाता है। जानना आसान लगता है, पर दवा खा लेना उससे भी आसान है, क्योंकि दवा में कुछ देखना नहीं पड़ता, और जानने में अपनी ही आदतें, अपनी ही नींद, अपना ही खानपान सामने आ जाता है। जानने की क़ीमत यही है कि जो वजह निकलेगी, वह अक्सर बाहर नहीं, अपने ही रोज़ के चुनावों में मिलेगी। इसलिए अगली बार जब कोई लक्षण उठे…















