
हां इस धरती पर जो भी है सब अपने हैं और मैं सब के साथ प्यार से व्यवहार करना चाहती हूँ क्योंकि हमारे गांव में जानवरों के साथ बहुत बुरा बर्ताव करते हैं और रोकने पर कहते हैं तुम्हे इतना प्यार है तो ले जाओ अपने घर में रख लो न ।पहले यह नहीं कर पाती थी क्योंकि मैं अपने समाज से दब जाती थी मेरे बहुत सारे स्वार्थ जुड़े होने के कारण पर अब मैं कोशिश कर रही हूं अपने पैरों होने सशक्त होने की ताकि मुझे घर,समाज के आगे मजबूर ना होना पड़े और मैं सही काम कर सकूं
















