
KHUSHBU RAI
humne dekha hi nahin iski aadat pad gai
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humne dekha hi nahin iski aadat pad gai

खुशबू जी, आपने एक झटके में मान लिया कि आदत पड़ गई है, देखा ही नहीं। ज़रा इसी पर रुकिए, यह जो फ़ैसला अभी-अभी आया कि हमने देखा ही नहीं, यह भी तो एक देखना ही है, है ना? यानी देखना शुरू हो चुका है, बस इतना छोटा कि खुद को उसका पता ही नहीं चला। नाखून बढ़ते हुए दिखते कभी नहीं, बढ़ते हमेशा हैं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401