
Talking Mirror
अरुण जी, आपने खुद ही रास्ता दिखा दिया, सिर्फ नाम मौन रख दिया। मौन का मतलब कहीं भाग जाना नहीं, बल्कि उस भेड़ चाल से हटकर देखना है कि मैं क्यों दौड़ रहा हूँ। आगे बढ़ने का सवाल तभी उलझन बनता है जब हम मान लेते हैं कि बढ़ना है इसलिए कि कुछ पकड़ में आ जाए। पर अगर देखने की गरज़ से बढ़ना है, कुछ पाने की गरज़ से नहीं, तो साथ कुछ जाएगा या नहीं, यह सवाल ही नहीं उठता। और दूसरे की मदद करना इच्छा मारना नहीं, इच्छा की दिशा बदलना है, अपने लिए चाहने से किसी और के…















