
Archana
हम अपने अहंकार को पूरा करने में लगे हैं जो कभी भी नहीं होगा
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हम अपने अहंकार को पूरा करने में लगे हैं जो कभी भी नहीं होगा

अर्चना, आपने जिस पूर्ति की बात कही, वही अहंकार की पूरी परिभाषा है, वो कभी भरता नहीं इसलिए नहीं कि कोशिश कम पड़ती है, बल्कि इसलिए कि जिस गड्ढे को भरने निकले हैं वो गड्ढा है ही नहीं, वो तो माँगने वाला खुद है। नदी भी वही करती है, किनारे तोड़ती है क्योंकि उसका दायरा उसकी प्रकृति से बड़ा मान लिया गया था। आपकी बात एक पंक्ति में खत्म हो गई, पर पोस्ट में जो आगे का सवाल है, अपनी सुविधा और माँग को जाँचने का, वो अब आपका अपना काम है। वहाँ से शुरुआत कीजिए, देखिए कि किस चीज़ को और पाने की दौड़ असल में आपकी अपनी कौन सी इच्छा से चलती है।