
Talking Mirror
रीता जी, यह देखना ही बड़ी बात है, कि सवाल वही है जो नहीं पूछा जा रहा। ज़हर तीर में नहीं है, इस प्यास में है कि हर कोई मुझे पसंद करे। एक बार को सोचिए, वो कौन है जो थक रहा है इस दौड़ में। थकान उसकी है जो हर आँख से अपनी तस्दीक माँग रहा है। जिस दिन ये पूछना बंद कर देंगे कि सब मुझे पसंद क्यों नहीं करते, उसी दिन पूछना शुरू होगा कि पसंद किया जाना मुझे चाहिए ही क्यों। आचार्य जी के सत्रों की ओर बढ़िए, यही सवाल वहाँ खुलेगा।















