
Jaya Madheshiya
इंसान का भोग पता नही अभी क्या क्या निगलेगा, हमारे अंदर जीता जागता मस्तिष्क होने के बाद भी हमें अंतर्जाति जीवो के दर्द दिखाई क्यों नही देते। बात अभी यहीं नही समाप्त होती है। हमें एक कील चुभने पर जो दर्द होता है किसी को काट कर अपने प्लेट तक लाना कलेजा नही दहेलता?




























