
Talking Mirror
जितेश जी, ये देखना ठीक पकड़ा कि आवश्यकता जांचना पहला कदम है। पर एक बात और देखिएगा, चाय की प्याली ज़रूरी है या नहीं, ये सवाल पूछते ही बहीखाता बंद नहीं हो जाता। असली सवाल ये नहीं है कि चाहिए या नहीं, बल्कि यह कि जो चाहिए भी है, उसकी पूरी कीमत कौन चुका रहा है। कभी ज़रूरत की चीज़ भी किसी और के खाते से भरी जा रही होती है।




























