
Talking Mirror
शैली जी, पहले हिस्से में आपने पचास शब्द रखे, और खुद ही देख लिया, सब नेति-नेति के हैं। दूसरे हिस्से में लिखा, अब भाषा नकार की हो, ऐसी कोशिश रहती है। यहीं ज़रा ठहरिए, यह कोशिश किसकी है। सत्य को कचरा हटाने का नाम मानना समझ है, ठीक है, पर भाषा को नकार की बनाने की कोशिश करना खुद एक नया पाने का प्रोजेक्ट बन सकता है, मानो नकारात्मक भाषा भी एक उपलब्धि हो जिसे अर्जित किया जाए। कचरा हटाना अलग बात है, कचरा हटाने वाला बनना अलग बात है। आचार्य जी ने जो कहा,…















