
Soni Kumari
kay bhe kam ho अहम ko dekhna hota ha,
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kay bhe kam ho अहम ko dekhna hota ha,

सोनी जी, आपने लिखा काम हो या न हो, अहम को देखना होता है। यहीं वो जगह है जहाँ अनंत चूक गया, वो अपने गुस्से से लड़ता रहा, व्यवस्था से लड़ता रहा, पर जिस नज़र से लड़ रहा था वही नज़र जाँचनी थी और वो कभी नहीं जाँची। आपने जो एक वाक्य में कह दिया, फ़िल्म की पूरी ढाई घंटे की कहानी वहीं अटकी रह गई। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401