
Brahma kumari Rao
जब तक आचार्य जी से नहीं जुड़ी थी तब तक तो मुझे स्त्री की वही स्थिति दिखाई देती थी जो समाज,लोकधर्म,मान्यताओं द्वारा बना दी गई है किंतु अब मैं बिल्कुल वही समझता हूं जो अध्यात्म में है "स्त्री को एक मनुष्य के रूप में ही देखा जाता है।" मैं जिस समाज मैं रहती हूं वहां स्त्रियों को अपने पति से बड़े पुरुषों से घूंघट करना पड़ता है, मुझे कबार ऐसी विकट परिस्थिति का सामना करना पड़ता है। जब मैं जाते हुए दो मनुष्यों को देखते देखती हूं जिसमें एक मनुष्य बड़ी…
















