
❓ क्या हम सचमुच बुद्धिमान हैं, या शरीर के एक संयोग पर अपना नाम लिख रहे हैं? इससे तो यही पता चल रहा है कि शरीर एक संयोग है और शरीर का मस्तिष्क भी एक प्राकृतिक और विकासशील प्रक्रिया से हे मनुष्य को प्राप्त हुआ है। किंतु मनुष्य शरीर के साथ साथ उसके सभी हिस्सों पर अपना अधिकार जमाता है और उसे वह अपना मानता है।
















