
Saraswati Ekka
यह मुझे मेरे बचपन से लेकर अब तक की बात याद दिला दी जब भी मैं गलत होती थी या होती हूं तो अपने मैं को ही बचाने की कोशिश करती हूं, यह स्वीकार करना कि गलती मुझ से भी हो सकती है और हो गई यह देख पाना कठिन हो जाता है अपनी मैं की छवि को बचाने के लिए। इससे मुझे गहरी सीख मिली कि गलती हो जाने पर स्वीकार करना ताकि मैं ना बचे यही सुधार की दिशा है।















