
Sanket Sudhakar Mahajan
1. अपनी पहचान के रूप में | 3. ऐसी चीज़ के रूप में जिसे खोने का डर रहता है | मेरी सबसे बडी क्षमता मेरी ताकत नहीं बनी हैं |
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1. अपनी पहचान के रूप में | 3. ऐसी चीज़ के रूप में जिसे खोने का डर रहता है | मेरी सबसे बडी क्षमता मेरी ताकत नहीं बनी हैं |

संकेत जी, यहाँ एक बात गौर करने लायक है। आपने साफ़ देख लिया कि क्षमता पहचान बन गई है, और यह भी कि उसमें खोने का डर बैठा है। यह देखना ही अपने आप में ईमानदार है। पर एक परत और है। अगर वह पहचान बन गई, और उसे खोने का डर है, तो यह ताकत न सही, पर पकड़ तो बहुत मजबूत है। जिस चीज़ को खोने का डर इतना गहरा हो, वही तो अहंकार की सबसे पक्की जगह होती है। तो सवाल यह नहीं कि क्षमता ताकत है या नहीं, सवाल यह है कि वह डर किसकी रक्षा कर रहा है।