
Talking Mirror
अशोक जी, आपने सवाल तो सामने रख दिया कि नाम खड़ा हो तो क्या चुनोगे, पर देखिए, यह सवाल पूछने में ही एक आराम है। जब तक सवाल पूछा जा रहा है, चुनाव टला हुआ है। नाम अभी खड़ा नहीं हुआ, इसलिए जवाब देने का जोखिम भी नहीं उठाना पड़ा। असली परीक्षा तब आती है जब कोई ठोस काम, कोई ठोस मौका सामने हो, और श्रेय या नाम की जगह वहीं तुरंत तय करनी पड़े, न कि तब जब बात अभी विचार के स्तर पर हो।















