
Sujan Singh
जिस किसी भी विषय इंसान जीव वस्तु के लिए मेरी लग जाए तो वो बदल जाती हैं फिर वो अहंकार ही आ जाता है
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जिस किसी भी विषय इंसान जीव वस्तु के लिए मेरी लग जाए तो वो बदल जाती हैं फिर वो अहंकार ही आ जाता है

सुजान जी, बिल्कुल पकड़ में आ गया। सोचिए कितना अजीब है, अक्षर वही रहता है, वस्तु वही रहती है, इंसान वही रहता है, सिर्फ आगे एक शब्द जुड़ता है 'मेरा', और पूरी चीज़ की कीमत बदल जाती है। मूल्य वस्तु में नहीं है, उस छोटे से शब्द में है। अब ज़रा वहाँ तक भी देखिए जहाँ यह पकड़ना मुश्किल हो जाता है, जैसे अपनी राय, अपनी समझ, अपना बोला हुआ सच, वहाँ भी वही 'मेरा' बैठा होता है या नहीं? --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401