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गीता सत्र। वाशिंग मशीन की तरह है जैसे कि हम रोज अपने कपड़े धोते हैं। वैसे ही आचार्य जी हमे गीता सत्र मे कपड़ों की तरह धोते है लेकिन हम इतने नालायक होते हैं सत्र से निकलने के बाद मिट्टी में लौटने लगते है। ओर फिर से वापस हमे धोने के लिए आचार्य जी को मेहनत करनी पड़ती है















