कुलदीप जी, जो है वो भी छिन जायेगा, ये डर दरअसल कह रहा है कि जो है वो पहले से ही बहुत कमज़ोर पकड़ में है। सोचिए, जिसके पास सच में मज़बूती हो, वो नए कदम से डरता है क्या? डर इस बात का सबूत है कि जो पास है उसे लेकर भी भरोसा नहीं, फिर कामयाबी न मिलने का डर तो बस ऊपर की परत है।