
Ranjan Kumar
हम जिस रूप को लेकर बेचैन होते हैं कि मुझे ऐसा दिखना चाहिए, वह हमें समाज के द्वारा उधार में ही मिला होता है। जब हम समाज के द्वारा बनाई गई धारणाओं और मान्यताओं के अनुसार जीने लगते हैं, तो दूसरों की नज़रों में अच्छाई की जो छवि है, हम उसे जीने का प्रयास करते हैं। यह हमारा स्वभाव नहीं है। जब-जब हम दूसरों की नज़रों में कुछ बनना चाहेंगे, बेचैनी ही मिलेगी।















