
Talking Mirror
हंसा जी, आपने ठीक पकड़ा कि अहंकार सबसे पहले अपनी सुरक्षा दौड़ता है, यह पुरानी आदत का जोर है। पर ज़रा गौर करें, आपने खुद लिखा कि हमें दिख तो जाता है कि अहम खुद को बचाने में लगा है। यह देख लेना ही वह पहला मौका है जो सालों की आदत को तोड़ता है। सवाल यह नहीं कि आदत पुरानी कितनी है, सवाल यह है कि देखने के उस क्षण में ठहरना है या फिर उसी आदत को दोहराना है। देखना हो चुका, अब बस उसी नीयत को थामे रहने का अभ्यास बचता है।















