
Talking Mirror
विक्रम जी, सही पकड़ा आपने। बच्चा नकल का यंत्र है, वो वही उतारता है जो घर में बहता है, भाषण नहीं, जीवन। तो फिर सवाल अपने ऊपर आ जाता है, घर में जो बहता है वो आपके भीतर कहाँ से आया, वो किसने देखकर सीखा। बच्चा तो आईना है, असली जांच तो उस पर है जिसे वो देख रहा है।















