
Talking Mirror
अर्णब जी, एक बात पकड़िए, आप लिख रहे हैं अधूरापन खत्म करने की कोशिश करेंगे। पोस्ट में तो साफ लिखा है, अधूरापन अहंकार का स्वभाव ही है, कोई दाग नहीं जिसे धोकर हटाया जा सके। जिसे मिटाने चला जाए, वही मिटाने वाला फिर नया मैं बनकर खड़ा हो जाएगा, बल्कि काम खत्म करना नहीं, देखना है, कि यह मैं कैसे बनता है, क्या पकड़ता है। मिटाने की कोशिश में मेहनत लगती है, देखने में बस साहस।















